Sunday, July 27, 2008

मान गए मुग़ल-ऐ-आज़म ||


उनका युहीं देख कर अन्देखा कर जाना ।

हर वक्त ख़याल घर कर जाता है ।

अपने आप को ढाढस बंधा पाता नही क्यूंकि ।

हर आईने में चेहरा उनका नज़र आता है ॥


उनकी मौसिकी का कुछ यूँ हुआ है असर मुझपर ।

की हर पल को ग़ज़ल की तरह गुनगुनाता हूँ ।

बात दो बात कर नही पाता किसीसे क्यूंकि ।

हर आवाज़ में अल्फाज़ उनका कोई सुन जाता हूँ ॥


एक टक देखा करता हूँ सिफर में, मैं ।

आहट किसी की नही ले पाता हूँ ।

पर जो हवा उनके आँचल को छू कर आती है ।

उसका एहसास तुंरत ही पा जाता हूँ ॥


बैठ कर दिनभर खिले गुलिस्ताँ में भी ।

पल दो पल को मुस्कुरा पाता नही मैं ।

ताज़े फूलों की महक में भी दअरसल।

अब्र उनका घुला घुला सा पाता हूँ ॥


यूँ तो आशिकों ने किए होंगे उनसे।

साथ जीने मरने के कसमे वादे।

पर मैं जो जीते जी मरा जा रहा हूँ।

वो जज़्बात नहीं बयाँ कर पाता हूँ ॥


6 comments:

shivani said...

Waaah !!!!...Maan Gayee Mughal-E-Aazam....!!!...No really I didn't know that u r so creative at heart...goood work dude...:).

I know it wud be too much fr you,,,bt it makes me feel proud to have frenz like u. I'm not saying it just fr the sake of writing something. But truely, only a person who is a good human being with a "HEART" can dare to write his mind and soul.
All my wishes n love for you:-
Bachpan ki Saathi,
Shivani Dwivedi
5th A
:P

Shobhit Srivastava said...

dhanyawaad hai aapka bahut bahut

Shobhit
Monitor-5th A

kriti said...

Very Nice....Very nice....
I absolutely dint hv ne idea tht u r soooo gud and creative...
Keep up the good wrk!!!

satish said...

abe sala tu bhi ppaanchvi mein monitor tha??

Rohit Karan said...

abe, yeh kahaa se topa hai be? :P

Good Work by the way.

Sapna said...

very good I'm proud of you mere bhai, ur poetry shows that u r from nawabon ke shahar LUCKNOW (so many urdu words) :)